200 लोगों की घर वापसी, पास्टर का धर्म त्याग! | बाइबिल क्या कहती है विश्वास छोड़ने वालों के बारे में?

छत्तीसगढ़ में घर वापसी अभियान और बाइबिल की दृष्टि


200 लोगों की घर वापसी, पास्टर का धर्म त्याग! | बाइबिल क्या कहती है विश्वास छोड़ने वालों के बारे में?

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छत्तीसगढ़ के आमाबेड़ा में एक धर्मांतरित व्यक्ति के शव को दफनाने को लेकर हुई हिंसा के बाद यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया। इस विषय पर हमने पहले ही एक डिटेल वीडियो बनाई थी, जिसका लिंक आपको नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा, ताकि आप पूरा बैकग्राउंड समझ सकें।

आमाबेड़ा के बाद तेज़ हुई घर वापसी

उस घटना के बाद अब उसी क्षेत्र और आसपास के इलाक़ों में घर वापसी का सिलसिला तेज़ होता दिखाई दे रहा है। प्रदेश में चल रही धर्मांतरण विरोधी मुहिम का असर ज़मीन पर साफ़ दिख रहा है।

इसी कड़ी में कांकेर ज़िले के पीठापाल क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ 200 से ज़्यादा ग्रामीणों ने ईसाई धर्म छोड़कर अपने मूल सनातन धर्म में वापसी कर ली है

ग्रामीणों ने हिंदू रीति-रिवाज़ों के अनुसार पूजा-पाठ किया, शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी की और विधिवत रूप से घर वापसी की। इस मौके पर स्थानीय हिंदू समाज द्वारा उनका स्वागत भी किया गया।

“हमने अपनी इच्छा से वापसी की” — ग्रामीणों का दावा

घर वापसी करने वाले सभी लोग पीठापाल क्षेत्र के ही निवासी बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि:

  • उन्होंने अपनी इच्छा से ईसाई धर्म छोड़ा है
  • धर्मांतरण के लिए कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं होता
  • मिशनरियों द्वारा उन्हें हिंदू देवी-देवताओं की पूजा न करने और हिंदुओं के खिलाफ भड़काने की बातें कही जाती थीं

यह भी दावा किया जा रहा है कि आमाबेड़ा में शव दफनाने को लेकर हुई हिंसा के बाद हिंदू संगठनों और स्थानीय समाज ने घर वापसी अभियान को और तेज़ कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप बीते कुछ दिनों में 200 से अधिक लोगों ने घर वापसी की।

पास्टर की घर वापसी? सवाल यहीं से शुरू होते हैं

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि बड़े तेवड़ा की घटना के बाद उस इलाके के चर्च प्रमुख (पास्टर) ने भी सनातन धर्म में वापसी कर ली

यही वो बिंदु है जहाँ सवाल उठते हैं:

  • आम लोग तो दबाव में आ सकते हैं, लेकिन एक पास्टर ऐसा कैसे कर सकता है?
  • बाइबिल ऐसे लोगों के बारे में क्या कहती है?
  • ऐसे लोगों का भविष्य क्या होता है?

और सच कहें तो, ऐसी घटनाएँ कहीं-न-कहीं विश्वास को चोट भी पहुँचाती हैं

तो आइए, भावनाओं से नहीं बल्कि बाइबिल के प्रकाश में इस पूरे विषय को समझते हैं।


बाइबिल विश्वास छोड़ने वालों को दो श्रेणियों में देखती है

बाइबिल के अनुसार, विश्वास छोड़ने वाले लोग मुख्य रूप से दो वर्गों में आते हैं:

  1. वे जो दबाव, भय या सताव के कारण विश्वास छोड़ देते हैं

  2. वे जो स्वार्थ, लालच और व्यक्तिगत लाभ के कारण विश्वास छोड़ते हैं

इन दोनों के लिए बाइबिल में अलग-अलग शिक्षाएँ और चेतावनियाँ दी गई हैं।


1️⃣ सताव और डर के कारण पीछे हटने वाले

📖 मत्ती 13:20–21 — बीज बोने वाले का दृष्टांत

प्रभु यीशु कहते हैं:

“जब क्लेश या सताव आता है, तो वह तुरंत ठोकर खा जाता है।”

ये वे लोग हैं:

  • जो वचन को भावनाओं से स्वीकार करते हैं, परिवर्तन से नहीं
  • जिनकी आत्मिक जड़ें गहरी नहीं होतीं
  • जो आशीष तो चाहते हैं, पर क्रूस नहीं
  • जिनके लिए यीशु समस्या सुलझाने वाला है, स्वामी नहीं

जब तक सब आसान होता है, विश्वास बना रहता है। लेकिन जैसे ही समाज, परिवार या व्यवस्था विरोध करती है — वे टूट जाते हैं।

यीशु ने ऐसे लोगों को शापित नहीं कहा

📖 यूहन्ना 16:33

“संसार में तुम्हें क्लेश होगा…”

👉 सताव आना असामान्य नहीं है। डर जाना इंसानी कमज़ोरी है।

पतरस का उदाहरण देखिए:

📖 लूका 22:61–62

“पतरस बाहर जाकर फूट-फूटकर रोया।”

उसने डर के कारण यीशु का इन्कार किया, लेकिन यीशु ने उसे त्यागा नहीं — बल्कि बहाल किया।

उड़ाऊ पुत्र (लूका 15:17–24) भी यही सिखाता है:

परमेश्वर लौटने वालों को ठुकराता नहीं, बल्कि गले लगाता है।

📖 नीतिवचन 24:16

“धर्मी सात बार गिरता है, और फिर उठ खड़ा होता है।”

👉 सताव में गिरने वाले के लिए पछताप और वापसी का द्वार खुला रहता है


2️⃣ स्वार्थ और लालच के कारण पीछे हटने वाले

ये वे लोग हैं जो यीशु को लक्ष्य नहीं, साधन बनाते हैं।

📖 रोमियों 16:18

“वे अपने पेट के दास होते हैं…”

👉 प्रभु की नहीं, अपनी ज़रूरतों और इच्छाओं की सेवा करते हैं।

📖 1 तीमुथियुस 6:5

“जो भक्ति को लाभ का साधन समझते हैं…”

📖 यूहन्ना 6:26–27

यीशु ने कहा:

“तुम मुझे इसलिए ढूंढते हो कि तुम तृप्त हुए।”

और आगे:

📖 यूहन्ना 6:66

“इस बात के बाद उसके बहुत से चेले पीछे हट गए।”

👉 सख़्त सच्चाई आते ही भीड़ छँट जाती है।

📖 मत्ती 13:22

“इस संसार की चिंता और धन का धोखा वचन को दबा देता है।”

लालच भी एक ठोकर है — लेकिन यहाँ कारण सताव नहीं, स्वार्थ है।

⚠️ इब्रानियों 10:38–39 — गंभीर चेतावनी

“यदि कोई पीछे हट जाए, तो मेरा मन उससे प्रसन्न न होगा…”

👉 सच जानकर, जानबूझकर मसीह को ठुकराना — बहुत गंभीर बात है।

📖 इब्रानियों 10:26–27

“सत्य की पहचान के बाद यदि हम जानबूझकर पाप करते रहें…”

यहाँ बात भावनात्मक गिरावट की नहीं, बल्कि जानबूझकर सत्य को अस्वीकार करने की है।


आज के समय के लिए चेतावनी

जो कुछ हम आज देख रहे हैं — यह केवल शुरुआत है।

बाइबिल बताती है कि यीशु के दूसरे आगमन से पहले:

  • और सताव होगा
  • और धोखे होंगे
  • और अंत में Antichrist का अंतिम धोखा

📖 प्रकाशितवाक्य 13 के अनुसार:

बिना छाप (666) लिए — रोटी, पानी और जीवन मुश्किल कर दिया जाएगा।

और सवाल ये है:

अगर उस समय आपका पास्टर ही कहे — “ले लो, कोई बात नहीं”… तो क्या आप लेंगे?

👉 आपका निर्णय क्या होगा?

कमेंट में ज़रूर बताइए।

अगर आप Antichrist और 666 के विषय में विस्तार से नहीं जानते, तो हमारी दी गई PLAYLIST ज़रूर देखें — लिंक डिस्क्रिप्शन में उपलब्ध है।


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