Touch Not The Anointed – क्या सवाल करना पाप है? | बाइबल क्या सिखाती है?

Touch Not The Anointed – क्या सवाल करना पाप है? | बाइबल क्या सिखाती है


Touch Not The Anointed – क्या सवाल करना पाप है? | बाइबल क्या सिखाती है


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✝️ भूमिका (Introduction)

आज कलीसिया में जब भी किसी प्रचारक, पास्टर या तथाकथित “अभिषिक्त” व्यक्ति की
शिक्षा, पैसे या जीवन-शैली पर सवाल उठाया जाता है,
तो अक्सर एक ही लाइन सामने आती है —

Touch Not The Anointed

लेकिन सवाल यह है 👉
📖 क्या बाइबल सच में हमें सवाल न पूछने की शिक्षा देती है?
📖 या फिर इस वचन का गलत इस्तेमाल करके लोगों को चुप कराया जा रहा है?

आइए, इस विषय को भावनाओं से नहीं, वचन से समझते हैं।


📖 “Touch Not The Anointed” कहाँ लिखा है?

यह वचन भजन संहिता 105:15 में मिलता है:

“मेरे अभिषिक्तों को मत छूना,
और मेरे भविष्यद्वक्ताओं को हानि न पहुँचाना।”

👉 लेकिन इसका संदर्भ (Context) क्या है?

भजन संहिता 105 एक इतिहास का भजन है।
यह किसी एक पास्टर या प्रचारक की नहीं,
बल्कि अब्राहम, इसहाक और याकूब
यानी पूरे इस्राएल के लोगों की कहानी बताता है।

यहाँ “छूने” का मतलब है —
❌ शारीरिक नुकसान
❌ हिंसा
❌ मार-पीट

👉 यहाँ सवाल पूछने, जांच करने या परखने की मनाही नहीं है।


⚠️ दोष लगाना और परखना — फर्क समझिए

 दोष लगाना (Personal Attack)

“तुम ऐसे हो”

 परखना (Discernment)

“यह शिक्षा / यह काम गलत है”

📖 बाइबल हमें व्यक्ति नहीं, शिक्षा और फलों को परखने को कहती है।


📖 बाइबल क्या सच में परखने की इजाज़त देती है?

1️⃣ आत्माओं को परखो

📖 1 यूहन्ना 4:1

“हर एक आत्मा का विश्वास न करो,
पर आत्माओं को परखो कि वे परमेश्वर की ओर से हैं या नहीं।”


2️⃣ झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो

📖 मत्ती 7:15

“झूठे नबियों से सावधान रहो…
उनके फलों से उन्हें पहचान लोगे।”


3️⃣ पौलुस ने पतरस को सार्वजनिक रूप से टोका

📖 गलातियों 2:11
पौलुस ने पतरस जैसे बड़े प्रेरित को भी
गलत काम के कारण सबके सामने टोका।

👉 अगर “Touch Not The Anointed” का मतलब
सवाल न करना होता,
तो पौलुस ऐसा कभी नहीं करता।


4️⃣ बेरिया की कलीसिया की तारीफ़ क्यों हुई?

📖 प्रेरितों के काम 17:11

उन्होंने पौलुस जैसे अपोस्टल की शिक्षा को भी
वचन से जाँचा —
और बाइबल ने उनकी तारीफ़ की।


🚨 आज “Touch Not The Anointed” का गलत इस्तेमाल कैसे होता है?

आज कई बार ऐसा होता है कि —

▪ जब पैसों पर सवाल उठे
▪ जब लाइफस्टाइल पर सवाल उठे
▪ जब गलत शिक्षा पकड़ी जाए

तो जवाब में कहा जाता है 👇
“Touch Not The Anointed”

👉 ताकि
❌ अकाउंटेबिलिटी से बचा जा सके
❌ सवाल पूछने वालों को दोषी ठहराया जा सके

लेकिन बाइबल ऐसा नहीं सिखाती।


✝️ यीशु मसीह ने क्या सिखाया?

प्रभु यीशु ने कभी भी
अंधा अनुसरण (Blind Following) नहीं सिखाया।

उन्होंने कहा 👇
📖 मत्ती 24:24

“झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्ता उठ खड़े होंगे।”

👉 मतलब —
सावधान रहो, परखो, जांचो।


✅ निष्कर्ष (Conclusion)

✔️ अभिषेक = लाइसेंस नहीं
✔️ सवाल पूछना = विद्रोह नहीं
✔️ परखना = आज्ञाकारिता है
✔️ सच्चाई = हमेशा वचन से तय होती है

कलीसिया व्यक्तियों से नहीं,
परमेश्वर के वचन से चलती है।


🗣️ आपकी राय क्या है?

क्या आपके साथ भी कभी
“Touch Not The Anointed” कहकर
आपको चुप कराने की कोशिश हुई है?

👇 कमेंट में अपनी राय ज़रूर लिखें
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सच्चाई, परख और बाइबल आधारित शिक्षाओं के लिए।

May God bless you & your Family




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